पेटेंट से आय पर कर कानून

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पेटेंट से आय पर कर के क्या कानून हैं ?

आकलन वर्ष 2017-18 से धारा  ११५ बी बी एफ आयकर अधिनियम के तहत  भारत में विकसित पेटेंट से आय  पर आयकर लगाया जायेगा

आयकर नियम १९६२ के नियम ५ जी  , पेटेंट से अर्जित आय के लिए बनाई  गयी है

पेटेंट के आय पर कौन से आयकर दर का प्राबधान  है ?

भारत में विकसित पेटेंट पर रॉयल्टी पर आयकर दर १० % है।

धारा  ११५ बी बी एफ  के अंतर्गत विशेष दर का दावा कौन कर सकता है ?

  • १) जो भारत का निवासी है और एक पेटेंटि भी है।
  • २) और जिनकी रॉयल्टी आय भारत में विकसित और पंजीकृत पेटेंट के संबंध में हो।

क्या धारा 115 बीबीएफ के तहत पेटेंट की विशेष दर वैकल्पिक या अनिवार्य है ?

कर दाता के लिए यह धारा 115 बीबीएफ वैकल्पिक है।

इसके लिए उन्हें , १३९(१) के टैक्स रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख से पहले फॉर्म नंबर ३ सी एफ ए दाखिल करके विकल्प पंजीकृत होना होगा।

प्रपत्र 3 सी एफ ए निम्नलिखित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए, अर्थात्: –

  • डिजिटल हस्ताक्षर के तहत इलेक्ट्रॉनिक या
  • इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के माध्यम से

 

एक बार जब आप धारा ११५ बी बी एफ के तहत मूल्यांकन का विकल्प चुनते हैं, तो क्या आप रॉयल्टी आय को सामान्य आयकर के दर से गणना किसी वर्ष में कर सकते  हैं ?

आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन उसका कुछ बुरे  नतीजे हो सकते हैं

हाँ  , सामने दर लगा सकते हैं , पर उसके बाद आप अगले पांच  सालो तक धारा ११५ बी बी फ को नहीं अपना सकते हैं

उदहारण के लिए,

यदि आपने आकलन वर्ष २०१७-१८  में आकलन के लिए धारा ११५ बी बी एफ का  विकल्प चुना है, और  मान लें कि वर्ष २०२०-२१  में आप ने धारा ११५ बी बी एफ विकल्प नहीं लिया, तो आप २०२१-२२  से २०२६ -२७  के निर्धारण वर्ष में धारा ११५ बी बी एफ लागू करने के लिए पात्र नहीं होंगे।

पेटेंट को “भारत में विकसित” कब माना जाएगा  ?

इसे भारत में तब विकसित माना जाएगा जब इसके  विकास पर कुल व्यय का ७५% भारत में  किया गया हो।

 

पेटेंट से संबंधित भुगतान को धारा ११५ बी बी एफ के लिए उपयुक्त कब माना जायेगा ?

रॉयल्टी उन सभी प्रकार के प्राप्त राशि को मानते है जो

१) पेटेंट के संबंध में सभी या किसी भी अधिकार (लाइसेंस देने सहित) का स्थानांतरण हेतु मिला हो

२) किसी पेटेंट के कामकाज, या इसके उपयोग के विषय में कोई भी जानकारी प्रदान करने  हेतु मिला हो  ; या

३) किसी भी पेटेंट का उपयोग हेतु मिला हो

४) ऊपर दी गयी उप-खंडो १  से ३  के किसी भी सेवा  प्रतिपादन हेतु मिला हो