घर का किराया और आयकर का छूट

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सरकार ऐसे सभी लोगो को जिन्हे अपने आवास हेतु किराया चुकाना होता है , को आयकर अधिनियम १९६१ के धरा ८०जीजी हे अंतरगत कुछ कटौती प्रदान करती है | नीचे दिए गए वीडियो आपको उसी कानून से अवगत कराने का एक प्रयास है

क्या व्यवसायी या  स्व रोजगार करने वालों को घर के किराये हेतु आयकर में कोई कटौती का प्राबधान है ?   आयकर के  धारा ८०जीजी के तहत ,कोई व्यक्ति जिन्हे मकान भारा भत्ता नहीं मिलता है ,परन्तु  अपने लिए घर  के किराया चुकाने होते हैं, वो किराये की राशि को , आयकर गणना करते समय ,अपने सकल आय से घटा सकते हैं

कितना किराया घटाया जा सकता है

निम्नांकित से सबसे कम राशि  को ८०जीजी के तहत घटाई जा सकती है

1) चुकाया  गया किराया – कुल आय का १० प्रतिशत

2) रु ५००० X किराया चुकाने के महीनो की संख्या

3) कुल  आय का २५%

इस तरह से आप अधिक से अधिक रु ६०००० के छूट का  दावा कर सकते हैं

 

धारा ८०जीजी के तहत कौन छूट का दावा  नहीं कर सकता है ??

निम्नांकित कारणों से आप छूट का दावा नहीं कर सकते हैं

1)  अगर आपको किराया भत्ता मिलता है

2) अगर आप या आपकी पत्नी या आपके अवयस्क बच्चे या आपके  हिंदू अविभाजित परिवार के पास उसी शहर में घर हो जहाँ आप व्यवसाय या स्व रोजगार करतें हैं

3) अगर आपने अपने घर के आय को स्वानिवास के वजह से शून्य आय का दावा किया है

इसलिए अगर आप किराया चुकाते हैं तो अपने सकल आय से धारा  ८०जीजी की कटौती करना ना  भूलें

धारा 80छछ.

संदत्त किराए की बाबत कटौती


80छछ. किसी निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में, जो ऐसा निर्धारिती नहीं है जिसकी आय धारा 10 के खंड (13क) के अंतर्गत आती है, उसके स्वयं के निवास के प्रयोजनों के लिए उसके अधिभोग में सुसज्जित या असज्जित निवास की जगह की बाबत किराए के (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) संदाय के लिए उसके द्वारा उसकी कुल आय के दस प्रतिशत से अधिक उपगत व्यय की, उस सीमा तक, जिस तक ऐसा व्यय 79क[दो हजार रुपए] प्रतिमास या उस वर्ष की उसकी कुल आय के पच्चीस प्रतिशत से, इनमें से जो भी कम हो, अधिक नहीं है और ऐसी अन्य शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए जो उस क्षेत्र या स्थान को जिसमें ऐसी जगह स्थित है और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए विहित की जाए, कटौती की जाएगी :


परन्तु इस धारा की कोर्इ बात निर्धारिती को किसी ऐसी दशा में लागू नहीं होगी जिसमें किसी निवास स्थान का,–


(i) निर्धारिती अथवा उसका पति या उसकी पत्नी अथवा अवयस्क संतान या जहां ऐसा निर्धारिती किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का सदस्य है, वहां ऐसा कुटुम्ब उस स्थान का स्वामी है, जहां वह मामूलीतौर पर निवास करता है या अपने पद पर नियोजन के कर्त्तव्यों का पालन करता है या अपना कारबार या वृति चलाता है; या


(ii) निर्धारिती किसी अन्य ऐसे स्थान का स्वामी है, जो निर्धारिती के अधिभोग में की ऐसी वास-सुविधा है जिसका मूल्य 81[धारा 23 की, यथास्थिति, उपधारा (2) के खंड (क) या उपधारा (4) के खंड (क) के अधीन] अवधारित किया जाना है।


स्पष्टीकरण.–इस धारा में, ”उसकी कुल आय के दस प्रतिशत” और ”उसकी कुल आय के पच्चीस प्रतिशत” पदों से अभिप्रेत है, इस धारा के अंतर्गत किसी व्यय के लिए कटौती अनुज्ञात करने के पूर्व निर्धारिती की कुल आय का, यथास्थिति, दस प्रतिशत या पच्चीस प्रतिशत